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Using there services since 2007, this blog is hosted on DreamHost :)

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Amazon Fire TV Stick Vs Google Chromecast

You might have already read lots of reviews about Amazon Fire TV Stick and Google Chromecast  so here is my bit of it, I Currently use both of them using Google Chromecase since 3-4 Years and Amazon Fire TV Stick  since a year now so these are based on my usage

  Chrome Cast
Product Amazon Fire TV Stick Google Chromecast 
Interface HDMI & Micro USB HDMI & Micro USB
Remote Yes No
Android App Yes Yes
Power Adaptor Included Not Included
Proxy Support Yes No
Cast Mobile Screen Yes Yes
Mobile Required No Yes
Amazon Prime Support Yes No
Youtube via Browser via Mobile Cast
Ability to Install Apps Yes No
Resolution 720p and 1080p up to 60fps Up to 1080p 60fps
Network

Wireless + Ethernet with Adaptor

Dual-band, dual-antenna Wi-Fi

supports 2x2 MIMO 802.11a/b/g/n/ac

Wireless

802.11a/b/g/n/ac (2.4GHz/5GHz)

Storage 8 Gb NA
RAM 1 Gb NA

Verdict : After using both the devices for more than a year i strongly recommend Amazon Fire TV Stick over Google Chromecast as it comes with Remote (Voice Search) and ability to install apps you do not need Mobile phone each time to use Amazon Fire TV Stick,

Utilizing Off Time in Internet Radio

Airtime Image from Wikipedia

No one likes a silence when tuning to a radio station, and for a radio manager its tough to have 24*7 programmes, in case you are running an Internet Radio Station using Airtime you probably would be programming your shows and in Offtime your radio is always silent i would suggest you to play some random tracks in this Offtime and also include a track which tells when your station plays live so here is how to achieve this

  1. Put some MP3 files in a folder of your server, please also record a message with the showtimings etc or what ever you want this folder may contain any number of files which you want to play in off time (Folder used in the below script /store00/rand)
  2. Edit /usr/lib/airtime/pypo/bin/liquidsoap_scripts/ls_script.liq (below is the patch) the modified lines are in bold

@@ -150,14 +150,14 @@
 #                "read_stop_all",
 #                fun (s) -> begin log("dynamic_source.read_stop") destroy_dynamic_source_all() end)

-default = amplify(id="silence_src", 0.00001, noise())
+#default = amplify(id="silence_src", 0.00001, noise())
 ref_off_air_meta = ref off_air_meta
 if !ref_off_air_meta == "" then
     ref_off_air_meta := "Airtime - offline"
 end
-default = rewrite_metadata([("title", !ref_off_air_meta)], default)
-ignore(output.dummy(default, fallible=true))
-
+#default = rewrite_metadata([("title", !ref_off_air_meta)], default)
+#ignore(output.dummy(default, fallible=true))
+default = playlist(mode='random', "/store00/rand/")
 master_dj_enabled = ref false
 live_dj_enabled = ref false
 scheduled_play_enabled = ref false

Once you have modifed you are good to go restart the services, upon restarting you will listem random tracks in offtime from the folder you have set in the script.

Tested on Airtime 2.5.1, do listem to VMOU's stream @ http://vmou.ac.in/stream

Resize Multiple Images

ImageMagick

I am sure you would have come to a situation when you would have to resize multiple images say you copied 200 images from your Digital Camera and now need to upload them and need to resize them all, now doing this using GIMP would take ages here is a easy way.

Step 1) Install ImageMagick

sudo apt-get install imagemagick

Step 2) Change to the Directory where all Images are Present

Step 3)

a) If you need to reduce images to a specific Percentage

mogrify -resize 20% -format jpg *

b) If you need to reduce to Specific Width & Height

mogrify -resize 800x600 -format jpg *

c) If you need to reduce to Specific Width

mogrify -resize 1024x -format jpg *

Further Reading Click Here !!!

Upgrade to Latest Version

Its been a long time since i blogged, recently i logged in and found that this site was still using Drupal 6 fortunate enough that it was the Final Version of D6, which has already reached End of Life on On February 24th 2016, so as a first step thought of upgrading this site to the latest version fortunately was not using many modules so was able to upgrade the site to Drupal 8.5.3 in less than 10 mins using the guide available on Drupal Docs, Upgrade was smooth as Drupal Migrate & UI Module were used was able to migrate entire site barring the Theme as D8 version of Kanji Theme which was used in D6 was not available will work a bit on some theme to give site a new look till then using the Default Theme :).

Will try to restart blogging this Year atleast.

फेसबुक पर रहें सुरक्षित

सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में आज सबसे बड़ा नाम फेसबुक है, मार्च २०१४ को फेसबुक की अधिकारिक घोषणा के अनुसार भारत में फेसबुक के १० करोड़ से ज्यादा सक्रीय उपभोगता हैं जो की फेसबुक का प्रयोग कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल एवं अन्य माध्यमो से करते हैं | आज के कंप्यूटर युग में सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है, करीब करीब रोज़ ही फेसबुक से जुडी घटनाये चर्चा में आ जाती हैं आईये जानते है कुछ तरीके जिनसे आप फेसबुक पर सुरक्षित रह सकते है

  • अपनी लॉग इन से सम्बंधित जानकारी किसी को न दे चाहे वे आपके कितने ही करीबी क्यों न हों|
  • फेसबुक इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल डिवाइस पर अधिकृत एप्लीकेशन का प्रयोग करें, अगर कंप्यूटर से इस्तेमाल कर रहे हो तो https://www.facebook.com पर ही लॉग इन करे |
  • फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड नियमित रूप से बदलें
  • फेसबुक अकाउंट के साथ साथ अपने प्राथमिक ईमेल अकाउंट की सुरक्षा का ध्यान दें|
  • अगर आप कंप्यूटर पर फेसबुक का इस्तेमाल कर रहें हैं तो लॉगआउट करना न भूलें |
  • अगर आप मोबाइल पर फेसबुक का इस्तेमाल कर रहें हैं तो मोबाइल को लॉक करना न भूलें |
  • कंप्यूटर पर इन्टरनेट ब्राउज़र और मोबाइल पर एप्लीकेशन हमेशा अपडेट रखें |
  • अगर आपके पास मोबाइल फोन है तो फेसबुक पर कोड जनरेटर का जरूर इस्तेमाल करें
  • फेसबुक के सुरक्षा सेटिंग्स से विश्वसनीय संपर्क जरूर जोड़ ले |
  • अगर आप गलती से किसी कंप्यूटर से फेसबुक से लॉगआउट करना भूल गए तो तुरंत  सुरक्षा सेटिंग्स में जाकर उसे लॉगआउट कर दीजिये |
  • फेसबुक पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले प्राइवेसी सेटिंग्स की जाच करलेना अच्छा रहता है |
  • डिफ़ॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग जरूर करले जिससे आपके द्वारा किये गए पोस्ट केवल उन्हें दिखे जिन्हें आप दिखाना चाहते हैं
  • आप अगर चाहे की आपको कोई फेसबुक पर ना ढूँढ सके तो इससे सम्बंधित सेटिंग्स भी आप कर सकते हैं
  • अगर आपको कोई टैग करे तो उसे जरूर जाँच ले
  • फ्रेंड रिक्वेस्ट को जचने के पश्चात् की स्वीकार करें

मुझे उम्मीद है की अगर आप ऊपर दिए हुए बिन्दुओ पर गौर करेंगे तो आपका फेसबुक अकाउंट सुरक्षित रहेगा |

~ अभिषेक नागर

5 जून 2014 को अमर उजाला के अखिल भारतीय संस्करणॊ में प्रकाशित

World IPv6 Launch

World IPv6 Launch

June 6 2012, is being celebrated worldwide as the IPv6 Launch Day, I just added an IPv6 to my blog and the IPv6 of this blog is 2607:f298:1:107::c53:5ffc

IPv6 was planned in the year 1996 but took decades to get launched many ISP's are still not supporting it but will soon start supporting the same. ISP's in India are yet to start their support to IPv6.

Here is a video of Vint Cerf, Chief Internet Evangelist at Google, and a founding father of the Internet, discusses the next version of the Internet, IPv6, and why we need it.

भारतीय भाषा तकनीकी मेरा सफर

आज पता नहीं बहुत दिनों बाद मन आया कुछ लिखने का, बहुत देर तक यही सोचता रहा की क्या लिखा जाये, अब तक तो हमेशा ही तकनीकी विषयों पर लिखा है पर पिछले कुछ दिनों पर नजर डाली तो ऐसा लगा की कुछ खास नया सा किया नहीं, और फिर अचानक ध्यान आया की भाई ये जो तू टाइप कर रहा है इसी में तो तूने पिछले दिनों काम किया है, शायद ये पहली बार ही है की हिंदी में ब्लॉग लिखने का साहस कर रहा है, बस मन बना लिया भारतीय भाषाओ पर कुछ लिखा जाये |

भारतीय भाषाओँ का इतिहास बहुत पुराना है, मै कोई इतिहासकार नहीं हूँ इसलिए इसपर कोई टिपण्णी करना उचित नहीं इसलिए अपने तजुर्बे से शुरू करता हूँ, पहली बार मैंने भारतीय भाषा में कंप्यूटर पर टंकण वर्ष १९९८ में किया था, मजे कि बात यह है कि जिस गलत विधि से १९९८ में टंकण मैंने किया वह विधि आज भी पूरे भारत में प्रचिलित है, मुझे अच्छी तरह याद है कि वर्ष २००० के आस पास ऐसे सॉफ्टवेर उपलब्ध थे जो कि उस समय कि प्रचिलित टंकण से भिन्न काम करते थे जैसे कि अंग्रेजी के Hindustan को हिंदी में हिंदुस्तान दिखा देते थे पर उस समय मुझे तनिक भी आभास नहीं था कि ये कैसे काम करते हैं, और इन्हें इस्तेमाल करना शुरुवात में तो ठीक लगा पर मुश्किल हो चला इसलिए वही पुराने तरीके पर लौट चला, इसी दौरान मैंने अपनी पहली वेबसाइट बना दी अमर उजाला अखबार की देखा देखी हिंदी भी वेबसाइट पर डाल दी अब किसे पता था की ये गलत तरीका है जिसके कंप्यूटर पर वो फॉण्ट होता उसपर वेबसाइट ठीक ठाक दिख जाती मन खुश रहता किसे पता था की ये कितनी बड़ी गलती है, और वर्ष २००७ तक ऐसा ही चलता रहा, २००७ में जब सिंबिओसिस में दाखिला हुआ नए माहोल में गया अचानक से पता चला की आज तक जो कुछ सीखा था उस्मे बहुत सुधर की जरूरत है, यू तो वर्ष २०००-०१ में पहली बार लिनक्स अपने कंप्यूटर पर डाला था क्योंकि एक मेगजीन के साथ फ्री आया था पर पहले ही दिन डर कर उसे हटा भी दिया था, यहाँ आकार पता चला की FOSS भी कुछ है, और बस एक नयी दुनिया में प्रवेश हुआ और सब बदल गया|

धीरे धीरे नई तकनीक पता चलती  रही,
कॉलेज में इन्टरनेट कम से कम काशीपुर या बनारस की तुलना में बहुत अच्छा था, मेरा ज्यादातर समय कॉलेज में ही बीतता था नई नई जानकारी मिलती पड़ता रहता FOSS की सोच ने प्रभावित किया बहुत लोगों से मिला जानकारी बड़ी UNICODE का भी पता चला, बस अब क्या था गूगल बाबा तो साथ थे ही, CMS के बारे में भी पढ़ा काशीपुर की वेबसाइट पूरी तरह से बदल चुकी थी द्रुपल/कम्युनिटी/FOSS ही दिमाग में रहने लगा इसी दौरान द्रुपल का लोकीकरण प्रोजेक्ट शुरू हुआ और मै हिंदी एवं मराठी के  लोकीकरण का काम करने लगा खुद भी हिंदी के शब्द जोड़ता रहता और लोगों के अनुवाद भी देखने लगा, उस समय कोई भी ये जिम्मेदारी लेने वाला आगे नहीं आया तो मैंने हिंदी एवं मराठी का द्रुपल लोकीकरण प्रबंधक होने की जिम्मेदारी लेली, बहुत मजा आने लगा, इसी बीच पुणे में ही नौकरी भी लग गयी ऑफिस में ज्यादातर अंग्रेजी में ही काम होता था जिसके कारण कुछ लोकीकरण का काम कम होता चला गया पर कुछ न कुछ करता ही रहता था |

आपको ज्ञात होगा की पिछले करीब २ वर्षों से मै
उत्तराखंड मुक्त विश्विद्यालय में कार्यरत हूँ, यह पहली संस्था है जहाँ मुझे अंग्रेजी के साथ साथ दूसरी भाषा जैसे कि हिंदी, संस्कृत एवं उर्दू पर भी अत्यधिक कार्य करने का मौका मिला यहाँ से पहले सॉफ्टवेर/वेबसाइट के लोकीकरण पर काम किया था कुछ खुद करता कुछ गूगल बाबा कि मदत से काम निकल जाता था पर यहाँ इससे काम चलना मुश्किल था क्योंकि यहाँ तो रोज मर्राह का कार्य भी हिंदी में होता है और सब लोग वही पुराने वाले तरीके से काम करते थे जो की इन्टरनेट पर नहीं चल सकता था, खुद के लिए भी कुछ ऐसा ढूँढना था जो अच्छा हो और जो बाकी सबको भी सिखाया जा सके, खुद को बदलना आसान होता है और में तो २००७ से ही इस बदलाव के लिए तैयार था सिंबिओसिस ने ये सिखा दिया था की कुछ नया सीखने के लिए पुराना गलत भुलाना पड़ता है बस क्या था वो सब फोंट्स सिस्टम से हटाये और कसम खाई की अब इन्हें नहीं इस्तेमाल करूँगा, बाकी सबको भी धीरे धीरे UNICODE के बारे मै बताया शुरुवात से UNICODE में टंकण करना बताया पुराने टंकित को UNICODE में परिवर्तित करना सीखा और समझाया कई बार बहस भी हुई पर आखिरकार परिणाम अच्छा ही रहा, अब संकट था की क्या UNICODE में भी अलग अलग तरीके से दर्शाया जा सकता है क्या UNICODE को प्रेस वाले छाप सकते हैं, सबने मना किया पर मुझे गौरव पन्त सर की बात याद आई की जो प्रिंट हो सकता है वो प्रेस में छप भी सकता है बस अब क्या था ठान लिया की अब ये छापेगा भी |

शुरुवात अपने घर से होती है ५० वर्षों से भी अधिक से छापते आ रहे पंचांग को इस वर्ष UNICODE में बनाया और लग कर छपवा भी लिया, घर की समस्या सुलझी अब बारी विश्विद्यालय की, छप तो जायेगा ही ये अब तक पता चल गया था, अब खोज चालू हुई उन फोंट्स की जो UNICODE का समर्थन करते हुए अच्छे भी दिखे FOSS ने ओपन टाइप फोंट्स दिए खोज खतम हुई C-DAC द्वारा निर्मित GIST ओपन टाइप फोंट्स पर बस अब क्या है टंकित लेखो को प्रेस, वैब, मोबाइल के लिए अलग अलग नहीं करना  पड़ता सभी लोग टंकण कर लेते हैं और वो सदियों पुराने Alt+Code भी याद नहीं रखने पड़ते|

हिंदी में ब्लॉग लिखने का ये मेरा पहला प्रियास है कुछ गलतियाँ जरूर होंगी अगले ब्लॉग पोस्ट में और अच्छा लिखने का प्रयास करूँगा एवं भारतीय भाषाओ को UNICODE में आसानी से कैसे टंकित करे इसपर चर्चा करूँगा !